संतुलन

Santulan

कितना बंटेगा,कितना रहेगा
ग़म का बादल हर बार छटेगा फिरसे बनेगा
कितना बयान करे कोई,कितना छुपाएगा
खुदको मोहरा बतलाकर,फिर हमदर्दी पाएगा

कितना सुनेगा,कितना कहेगा
मतभेद भी रखेगा,कब तक सहमति भरेगा
कब तक चुप्पी रहेगी,ये तो वक़्त बताएगा
क्या फायदा तक बोलकर जब पानी सर तक भर जाएगा

कितना खलेगा,कितना चलेगा
आज साथी है जो ,कल वैरी बनेगा
इक हादसे को वो ही उपहार बताएगा
भग्नाशा की गोद में जो आशा का वृक्ष उगाएगा

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