Collection of Best Rahat Indori Shayaris

Rahat Indori, one of the most prominent Urdu shayars of our country. His writing gives a unique perspective. Here’s a collection of best Rahat Indori Shayaris which you will love.

Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai Zamane Mere,
Fir Bhi MashHoor Hain Shaharon Mein Fasane Mere,
Zindagi Hai Toh Naye Zakhm Bhi Lag Jayenge,
Ab Bhi Baaki Hain Kayi Dost Puraane Mere.

Haath Khali Hain Tere Shahar Se Jate Jate,
Jaan Hoti Toh Meri Jaan Lutate Jate,
Ab Toh Har Haath Ka Patthar Humein Pehchanta Hai,
Umr Gujri Hai Tere Shahar Mein Aate Jate.

Chehron Ke Liye Aayine Kurbaan Kiye Hain,
Iss Shauk Mein Apne Bade Nuksaan Kiye Hain,
Mehfil Mein Mujhe Gaaliyan Dekar Hai Bahut Khush,
Jis Shakhs Par Maine Bade Ehsaan Kiye Hain.

Use Ab Ke Wafaon Se Gujar Jaane Ki Jaldi Thi,
Magar Iss Baar Mujhko Apne Ghar Jaane Ki Jaldi Thi,
Main Aakhir Kaun Sa Mausam Tumhare Naam Kar Deta,
Yehan Har Ek Mausam Ko Gujar Jaane Ki Jaldi Thi.

Maine Apni Khushk Aankhon Se Lahoo Chalka Diya,
Ik Samandar Keh Raha Tha Mujhko Paani Chahiye.

Bahut Guroor Hai Dariya Ko Apne Hone Par,
Jo Meri Pyaas Se Uljhe Toh Dhajjiyan Ud Jayein.

Aate Jate Hain Kayi Rang Mere Chehre Par,
Log Lete Hain Mazaa Zikr Tumhara Kar Ke.

ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे।

लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ है इतना डरते है तो घर से निकलते क्यूँ है।

शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं है हम आँधी से कोई कह दे के औकात में रहे।

आँखों में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।

एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो।

फूक़ डालूगा मैं किसी रोज़ दिल की दुनिया ये तेरा ख़त तो नहीं है की जला भी न सकूं।

कही अकेले में मिलकर झंझोड़ दूँगा उसे जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे,

मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उस का इरादा मैंने किया था की छोड़ दूँगा उसे।

प्यास तो अपनी सात समन्दर जैसी थी, ना हक हमने बारिश का अहसान लिया।

नये किरदार आते जा रहे है मगर नाटक पुराना चल रहा है।

उस की याद आई है, साँसों ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनो से भी इबादत में ख़लल पड़ता है।

मैं वो दरिया हूँ की हर बूंद भँवर है जिसकी, तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

हर एक हर्फ का अन्दाज बदल रक्खा है आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा है

मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया मेरे कमरे में भी एक ताजमहल रक्खा है।

ना हम-सफ़र ना किसी हम-नशीं से निकलेगा हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा।

तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है चाँद पागल है अंन्धेरे में निकल पड़ता है।

That’s all in Best Rahat Indori Shayaris collection. Also read | Collection of Best Dialogues of Rishi Kapoor

Vedant Dave:
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